सूर्यनमस्कार के साथ प्राणायाम भी करें
कोरोना से बचाव के लिए प्राणायाम के साथ सूर्य नमस्कार करना भी बेहतर है। योग प्रशिक्षिक ने बताया कि योग के अभ्यास से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं और तनाव दूर रहता है।


सूर्य नमस्कार
योगासन में सर्वश्रेष्ठ प्रक्रिया है सूर्य नमस्कार
सूर्यनमस्कार में एक तरह से सभी आसनों का समावेश है। इसलिए अगर समय कम है तो यह कर सकते हैं। साथ ही पांच-पांच मिनट के लिए अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका, कपालभाति प्राणायाम भी कर लें। प्राणायाम हमारे श्वसन तंत्र को मजबूत रखता है और शरीर में आक्सीजन की कमी नहीं होती है। कोरोनाकाल में काफी लोग योग को दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं। योग के साथ ही जीवनशैली में भी सुधार आवश्यक है। देर तक न जागें। कोशिश करें कि रात में दस बजे तक सो जाएं और आठ घंटे की नींद लेते हुए सुबह जल्दी उठें। तरल पदार्थाें का खूब सेवन करें। हालांकि जूस के बजाय फल खाएं, जिससे फाइबर की अच्छी मात्रा मिलती रहे।
सूर्य नमस्कार मंत्र
सूर्य नमस्कार में बारह मंत्र बोले जाते हैं। प्रत्येक मंत्र में सूर्य का भिन्न नाम लिया जाता है। हर मंत्र का एक ही सरल अर्थ है- सूर्य को (मेरा) नमस्कार है। सूर्य नमस्कार के बारह स्थितियों या चरणों में इन बारह मंत्रों का उच्चारण जाता है। सबसे पहले सूर्य के लिए प्रार्थना और सबसे अंत में नमस्कार पूर्वक इसका महत्व बताता हुआ एक श्लोक बोलते हैं -
ॐ ध्येयः सदा सवितृ-मण्डल-मध्यवर्ती, नारायण: सरसिजासन-सन्निविष्टः।
केयूरवान् मकरकुण्डलवान् किरीटी, हारी हिरण्मयवपुर्धृतशंखचक्रः ॥
ॐ मित्राय नमः।
ॐ रवये नमः।
ॐ सूर्याय नमः।
ॐ भानवे नमः।
ॐ खगाय नमः।
ॐ पूष्णे नमः।
ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।
ॐ मरीचये नमः। (वा, मरीचिने नम: - मरीचिन् यह सूर्य का एक नाम है)
ॐ आदित्याय नमः।
ॐ सवित्रे नमः।
ॐ अर्काय नमः।
ॐ भास्कराय नमः।
ॐ श्रीसवितृसूर्यनारायणाय नमः।
आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने।
आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते ॥
जो लोग प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करते हैं, उनकी आयु, प्रज्ञा, बल, वीर्य और तेज बढ़ता है।
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